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जानिए केसा रहेगा नव संवत्सर (विक्रम संवत्)–2073

vikram_samvat
नव विक्रमी संवत 2073 का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी नवरात्र के पहले दिन (आठ अप्रैल) से होगा। इस वर्ष का राजा शुक्र और मंत्री बुध है। 60 संवत्सर में ये 43 वॉं सौम्य संवत्सर है जिसका स्वामी चन्द्र है। हालाँकि 23 मई 2016 को 11 बजकर 01 मिनट से साधारण नामक संवत्सर का प्रवेश होगा लेकिन संवत्सर का आरम्भ चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा दिनांक 08 अप्रैल 2016 शुक्रवार के समय सौम्य नामक संवत्सर रहेगा अतः वर्ष पर्यन्त संकल्पादि में सौम्य संवस्तर का ही विनियोग करना चाहिये। और वर्ष पर्यन्त इसी नाम के संवत्सर का फल प्राप्त होगा।
सौम्य संवत्सर होने से इस साल अनुकूल वर्षा होने के साथ ही ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार फैशन जगत के क्षेत्र में नए प्रचलन आने की बात कही है। साथ ही कहा है कि बुध के मंत्री होने से पेट्रोलियम वस्तुओं के भाव बढ़ेंगे। चैत्र नवरात्र के पहले दिन जो वार होता है उसे वर्ष का राजा माना जाता है और बैसाखी के दिन जो वार होता है उसे वर्ष का मंत्री माना जाता है। इस हिसाब से साल का राजा शुक्र और मंत्री बुध है। इसी दिन चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हाेगा। और समापन 15 अप्रैल को शुक्रवार के ही दिन होगा। गत वर्ष की तरह इस बार भी चैत्र नवरात्र आठ दिन की ही होगी। इसकी वजह कुछ पंचांगों में चतुर्थी व पंचमी तो किसी में पंचमी व षष्टी तिथि का एक दिन होना है। शुक्रवार से नव संवत्सर का शुभारंभ होना पंडित पूरे वर्ष के लिए लाभकारी मान रहे हैं। इसकी वजह यह है कि शुक्रदेव वैभव,विलासिता व भौतिक सुख साधन देने वाले देव हैं,जबकि इस दिन की अधिपति देवी मां लक्ष्मी हैं,जो सुख,धन व ऐश्वर्य प्रदान करती है।
पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार सौम्य संवत्सर होने से देश में अनुकूल वर्षा होगी। पाकिस्तानअफगानिस्तान आदि देशों में उपद्रव विस्फोट एवं अशांति फैलेगी। तिवारी के अनुसार अतिवृष्टि से बाढ़ आदि का प्रकोप पश्चिमी प्रदेशों में रहेगा। आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में अचानक वृद्धि होगी।
इस वर्ष विक्रम सम्वत् नव संवत्सर( 2073 ) में ग्रहों की सत्ता इस बार शुक्र के हाथ में होगी। दोहरी जिम्मेदारी के रूप में वित्त मंत्रालय भी शुक्र को संभालना होगा। मंत्री का पद बुध के पास आ जाएगा।कानूनव्यवस्था भूमिपुत्र मंगल के जिम्मे होगी। सत्ता के इन चार महत्वपूर्ण पदों में से तीन की जिम्मेदारी सौम्य ग्रहों के पास रहेगी।अभी राजा का पद शनि व मंत्री का जिम्मा मंगल ने संभाल रखा है।आगामी नवसंवत्सर 2073 से सत्ता में बड़ा बदलाव हो रहा है। ग्रहों के नए मंत्रिमंडल में हर ग्रह की जिम्मेदारी बदल जाएगी। इससे पहले संवत 2069 में शुक्र प्रधानमंत्री बने थे।
 8 अप्रेल को विक्रम संवत 2073 शुरू होगा और नवसंवत्सर के पहले दिन से ही नया मंत्रिमंडल प्रभावी हो जाएगा।हालांकि प्रतिपदा एक दिन पूर्व 7 तारीख से शुरू हो जाएगी लेकिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा 8 को रहने से नवसंवत्सर इस दिन से शुरू होगा।
नए मंत्रिमण्डल में सत्ता सौम्य ग्रह के पास होने के साथ सवंत्सर का नाम भी सौम्य ही होगा। इसी के साथ पुराने संवत्सर तिलक की विदाई हो जाएगी। जानकारों का कहना है कि सौम्य के राज में जनता में भौतिक सुखसुविधाओं से जीवन यापन करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। इस दौरान सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही में भी वृद्धि देखी जाएगी।
राजा (प्रधानमंत्री) शुक्र :- धान्य उत्पादन में वृद्धि, समाज में महिलाओं का वर्चस्व तेजी से बढ़ेगा।
मंत्री बुद्ध :— व्यापारियों के लिए विशेष लाभकारी। बैंकों के कारोबार बढऩे के साथ उनका एकीकरण भी बढ़ेगा। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होगी।
धनेश (वित्त मंत्री) शुक्र :- शेयर मार्केट में उथलपुथल रहेगी। देश के सूचना एवं प्रौद्योगिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।
दुर्गेश (गृहमंत्री) मंगल :- अपराध में बढ़ोतरी होगी लेकिन नवीन तकनीकों से अपराधियों को पकडऩे की रणनीतियां बढ़ेंगी।
अग्र धान्यधीपो (कृषि मंत्री) शनि :-जनता में रोग व पीड़ा बढ़ेगी। सरकार और जनता में तालमेल की कमी होगी।
पश्च धान्यधीपो (खाद्यमंत्री) गुरु :-कृषि विकास एवं भूमि सुधार होगा।
मेघेश (जलदाय मंत्री) मंगल :- कहीं वर्षा कम तो कहीं अधिक होगी।
रसेश (डेयरी एवं गोपालन मंत्री) सूर्य :- दूधघी के उत्पादन में कमी होगी। डिब्बा बंद सामग्री का प्रचलन बढ़ेगा।
निरसेश (खनिज, परिवहन मंत्री) शनि :- पेट्रोलियम पदार्थ महंगे हो जाएंगे। यातायात के साधन बढ़ेंगे।
फलेश (वन एवं पर्यावरण मंत्री) मंगल :- वृक्षों पर फलफूल कम लगेंगे। 
पद अभी ग्रह नए स्वामी
राजा शनि शुक्र
मंत्री मंगल बुध
अग्रधान्यधीपो गुरु शनि
पश्चधान्यधीपो बुध गुरु
मेघेश चंद्रमा मंगल
रसेश शनि सूर्य
निरसेश गुरू शनि
फलेश चंद्रमा मंगल
धनेश गुरू शक्र
दुर्गेश चंद्रमा मंगल

 

इस संवत्सर में लोग अन्न अधिक होने,महगाई कम होने,वृष्टि अच्छिी होने के कारण प्रसन्नचित रहते है। राजाओं में आपस में बैर नही होता ब्राहमण अपनी परम्परा के अनुसार चलते रहते है।
पृथ्वी पर वृष्टि आधी होती है महगाई कम रहती है लेकिन आतंक और भय का वातावरण साधारण आदमी पर छाया रहता है। धनी लोगों को मामूली आमदनी होती है। लेकिन प्रजा प्रसन्न रहती है।
शुक्र राजा होने से फैशन आदि के क्षेत्र में नए प्रचलन आएंगे।आध्यात्मिक प्रवृत्तियां विकसित होंगी। प्रत्येक क्षेत्र में स्त्रियों का प्रभाव बढ़ेगा। बुध मंत्री होने से पेट्रोलियम वस्तुओं के भाव तेज होंगे।
शनि की दृष्टि उत्तर दिशा की ओर रहेगी, इसके फलस्वरूप उत्तरी प्रांतों बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक प्रकोप एवं पूर्वी राज्यों में सत्ता परिवर्तन की प्रबल संभावनाएं बनेंगी।
वर्ष लग्न:-
                                      वर्ष कुण्डली में बुध लग्नेश और दशमेश होगर अष्टम बैठ जाने से भारत वर्ष के लिये कोई भी उन्नति संबधी कार्य करने के लिये विशेष मेहनत की आवश्यकता होगी कोई भी उन्नति कार्य आसानी से नही बन पायेगें।शुक्र गृह धन भाव एंव भाग्य के स्वामी होकर सप्तम भाव में सूर्य और चन्द्र के साथ बैठकर लग्न को देख रहें है अतः देश की आर्थिक स्थिति एंव धन संचय की योजना बनेगी बहुत सारे कार्य भाग्यवश होने की संभावना बनेगी चूकि सूर्य की उपस्थिति शुक और चन्दमा को थोड़ा कमजोर किये हुये है अतः‘ इन तमाम सभावनाओं को बड़ी मेहनत और होशियारी से ही किया जा सकता है।मंगल गृह वर्ष कुण्डली में स्वग्रही होकर देश की आन्तरिक एंव बाह् सुरक्षा को मजबूत करेगें।गुरू गृह सुख एंव व्यापार का स्वामी होकर द्वादश भाव में राहु के साथ बैठ कर अन्तराष्टीय स्तर पर कारोबार के उन्नति हेतु भारी मशक्कत करनी होगी ।शनि पंचम भाव एंव षष्ठ भाव को स्वामी होकर तृतीय भाव में बैठकर भारत की अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भारी मान सम्मान एंव स्वास्थ्य सम्बन्धी क्षेत्र में कुछ अच्छा होने के आसार  हैें।केतु वर्ष कुण्डली में षष्ठम भाव में बैठ कर असभंव कार्य को भी संभव कर देने की क्षमता पैदा करेंगे।
वर्षा योगः
                                    आद्रा प्रवेशांक के विचार से वर्षा के योग लगभग समान्य ही रहने के आसार है।बुध लग्नेश होकर द्वादश भाव में बैठने से जहां तहां सूखे का योग रहेगा। चन्द्रमा की दृष्टि लग्न में होने के कारण वर्षा की स्थिति मे सुधार होने की सभावना रहेगी। पूर्वोत्तर राज्योे में वर्षा अच्छी होने के आसार है। फसलो का उत्पादन लगभग अच्छा ही होने के आसार रहेंगे।
इस वर्ष के राजा शुक का फल:- जिस वर्ष के राजा शुक्र हो उस वष कषि उपज अच्छी होती है। नदियो में भरपूर जल बहाव रहता है। वृक्ष फलों से युत रहतें है। भूजल स्तर अच्छा रहता है। जल वृष्टि अच्छी हो गाये अधिक दूध देवें।
इस वर्ष के मंत्री बुध का फल:- धन किस तरह संचय होगा शत्रुओं को पराजित कैसे किया जाये और अपनी विदेश नीति कैसी को इस सब पर गहन चिन्तन का वष रहेगा। बुध का मंत्री होने के कारण स्त्रियां पति के साथ सुख पूर्वक जीवन बितायेगीं।धन इकठठा होगा।
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भारत वर्ष कि यदि नाम राशि धनु माने तो इस पूरे वर्ष शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा इस वर्ष शनि धन एंव पराक्रम के स्वामी होने कारण धन संचय एंव विश्व स्तर पर मान सम्मान बरकरार रखने के लिये कठोर परिश्रम करना पड़ेगा।अन्तराष्ट्रीय व्यापारिक सम्बन्ध मधुर होंगें।विश्व के बड़ी हस्तियों के सहयोग से चारों तरफ मान सम्मान बढ़ेगा।ग्रह योग बताते हैं कि अर्थव्यवस्था पर पूरे नव संवत्सर 2073 के चलते शुक्र का खास प्रभाव दिखाई देगा। भूमि,भवन,वाहन,ज्वैलरी और खाद्यान्न और इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं पदार्थों की कीमतों में कभी एकदम तेजी तो कभी भारी गिरावट आएगी।न्याय और प्रशासनिक तंत्र मजबूत होगा। इसकी वजह शुक्र व शनि ग्रह में मित्रता है। शनि को न्याय का देवता माना जाता है। शुक्र व बुध के सामंजस्य की वजह से सत्तारूढ़ दल व विपक्षियों के बीच मतभेद के बावजूद आर्थिक मामलों में सामंजस्य भी बनेगा। दूसरी ओर शुक्र गृह के इस साल का राजा होने के कारण कला व साहित्य के क्षेत्र के लोगों के लिए उन्नतिकारक होगा।शुक्र के राजा रहने पर इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं,सौंदर्य प्रसाधन,सिनेमा व्यवसाय में तेजी व लेखन के क्षेत्र में साहित्यकारों की ख्याति बढ़ेगी। दूसरी ओर खाद्यान्न के भावों में कभी तेजी,कभी मंदी रहेगी। कई देशों से भारत की आर्थिक व सामरिक संधियां होंगी। महिलाओं की सुरक्षा व उनके संवैधानिक अधिकार और बढ़ेंगे। महिला कला नेत्रियों को उच्च पद व पुरस्कार मिलेंगे।
***उपरोक्त राशिफल चन्द्र राशि आधारित हैं। देश, काल और परिस्थिति अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं। अपनी कुंडली के अनुसार गोचर फल का भी ध्यान रखें।
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राहु एंव केतु गृह की स्थितिः
राहु:- वर्षभर सिंह राशि मे रहकर तुला मिथुन मीन राशि के लिये शुभ रहेगा।
केतुः वर्ष भर मेष धनु एंव कन्या राशि वालों के लिये शुभ रहेगी।
गुरू की स्थिति:-
गुरू 07 अगस्त 2016 की 12.41 रात से गुरू कन्या राशि में चलें जायेगें तारीख 15 जनवरी 2017 करे तुला राशि में जायेगे। फिर वक्री होकर 01 मार्च 2017 को कन्या में वापस आ जायेगें जो संवत्सारन्त कन्या में रहेंगे।
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गृहण की स्थितिः
इस वर्ष विश्व में 02 सूर्य गृहण होगें एक 01 सितम्बर 2016 व दूसरा 26 फरवरी 2017  इनमें से कोई भी भारत वर्ष में नहीं दिखंगें ।इस वर्ष विश्व में कोई भी चन्द्र गृहण नही होगें।
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जानिए 12 राशियों का सम्वत् 2073 का सूक्ष्म वर्षफल
मेष राशि –  सामान्य रूप से अच्छा काम रहेगा। बिगाडेगी शनि की अढ़ैया।
वृष राशि –  कुछ दिक्कतों के अतिरिक्त शेष शुभफलकारक रहेगा वर्ष।
मिथुन राशि इन राशि वालों के लिये यह वर्ष शुभफलकारक रहेगा।
कर्क राशि  आर्थिक स्थिति मजबूत होगी ।
सिंह राशि आर्थिक स्थिति कमजोर कर सकती है । शनि की अढ़ैया।
कन्या राशि सम्मान एंव यश मिलेगा।
तुला राशि – शनि की साढे़साती करायेगी धन लाभ।
वृश्चिक राशिमानसिक तनाव पैदा कर सकती है , शनि की साढ़ेसाती ।
धनु राशि धन संचय में सहयोग करेगी शनि की साढ़ेसाती ।
मकर राशि लाभ प्राप्त होने का समय रहेगा 2016 लकिन फरवरी 2017 में इस राशि में शनि की साढ़ेसाती मानसिक तनाव दे सकती है।
कुम्भ राशिः आत्म मंथन एंव चिन्तन का समय मिला जुला रहेगा 2016
मीन राशि सभी प्रकार के सुख प्राप्त होने का समय ।
उपरोक्त राशिफल चन्द्र राशि आधारित हैं। देश, काल और परिस्थिति अनुसार परिणाम भिन्न हो सकते हैं। अपनी कुंडली के अनुसार गोचर फल का भी ध्यान रखें।
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by Pandit Dayanand Shastri.

 

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